Suicide (Author: R. Ranjan)
एक गीत का बोल है:- मैंने दिल से कहा ढूंढ लाना खुशी....नासमझ लाया गम तो ये गम ही सही........ मर जाना एक बहुत बड़ी त्रासदी है। शायद सबसे बड़ी। तमाम दुख, तकलीफें, खुशियां, असंतुष्टि, नेम, फेम या बदनामी का अस्तित्व तभी तक है, जब तक सांसें चल रही हों। एक बार दम निकला नहीं कि सब कुछ निरर्थक हो जाता है। फिर भी लोग मर जाते हैं। खुशी-खुशी। पूरे होशो-हवास में जान जैसी चीज लुटा देते हैं, जिसको वापस पाने का कोई जरिया नहीं।
आत्महत्या का किसी व्यक्ति की संपन्नता या विपन्नता से कोई संबंध नहीं है। इन दिनों तो हर आयु वर्ग में भी आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं। आए दिन आप ऐसी खबरें पढ़ते-देखते होंगे कि किसी परेशानी से आजिज आकर परिवार के सदस्यों ने सामूहिक रूप से आत्महत्या कर ली या फिर किसी व्यक्ति विशेष ने आत्महत्या की या फिर उसने इसका प्रयास किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक दुनियाभर में हर साल 8 लाख लोग आत्महत्या (Suicide) करते हैं। यानी हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान ले लेता है। WHO की ओर से आत्महत्या (Suicide) पर जारी ग्लोबल डाटा के मुताबिक आत्महत्या (Suicide) करने वालों में 15 से 29 साल के लोगों की तादाद सबसे ज्यादा है। खुदकुशी या आत्महत्या (Suicide)के बारे में लोग अक्सर बात करने से हिचकते हैं। ऐसे में होता यह है कि जो लोग खुदकुशी करने के विचारों या जज्बात से जूझ रहे होते हैं, वो किसी से बात नहीं कर पाते और खुद को अकेला महसूस करते हुए खुदकुशी के विकल्प को आखिरी हल मान बैठते हैं।
थक गया हूँ सोती रातों में जाग-जाग कर,
थक गया हूँ ये ....पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें:- "आत्महत्या"
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